आखिर कौन बिकवा रहा डाट की पुल सहित अन्य क्षेत्र में अवैध शराब! कौन 'पुष्पा राज' स्टाइल में दे रहा संरक्षण, अवैध शराब बिक्री से राजस्व को नुकसान
रतलाम। शहर में अवैध शराब का कारोबार लगातार सवालों के घेरे में है। डाट की पुल क्षेत्र में खुलेआम अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कौन अवैध शराब बिकवा रहा है और कौन पुष्पा राज स्टाइल में इनको संरक्षण दे रहा है?
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार डाट की पुल, लक्ष्मणपुरा से लगे हुए क्षेत्र और सैलाना ब्रिज के नीचे कथित रूप से अवैध शराब की बिक्री हो रही है। इन स्थानों पर शराब बिकने की सूचना जिम्मेदारों तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

अवैध शराब की बिक्री को लेकर चर्चाओं का दौर इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों तक सूचना पहुंचाए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद मौके पर तत्काल जांच या कार्रवाई नहीं होने के आरोप हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि आबकारी विभाग को अवैध शराब बिक्री की सूचना मिलती है तो उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी मौके पर पहुंचकर तथ्यों की जांच करना और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करना नहीं है?
सूचना के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
डाट की पुल क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की जानकारी जिम्मेदारों तक पहुंचाने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने के आरोपों ने विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर अवैध शराब की शिकायत को गंभीर मानते हुए संबंधित क्षेत्र में जांच, स्टॉक और बिक्री की वैधता की पड़ताल तथा आवश्यकता होने पर जब्ती जैसी कार्रवाई की जाती है। लेकिन यहां सवाल यह है कि सूचना मिलने के बाद विभाग ने क्या कदम उठाए? क्या मौके पर जांच की गई? यदि जांच हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा? और यदि जांच नहीं हुई तो शिकायत को नजरअंदाज करने का कारण क्या था? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।

वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंच भी बनी सवाल
अवैध शराब बिक्री को लेकर विभागीय स्तर पर फोन के माध्यम से संपर्क करना चाहा तो फोन नहीं उठाया गया। वही अवैध शराब बिक्री की सूचना के संबंध में रतलाम जिला आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त विकास मंडलोई से संपर्क करने के लिए विभाग के जिम्मेदारों से मोबाइल फोन नंबर मांगा गया, तो नंबर उपलब्ध नहीं कराया गया। यदि किसी नागरिक या सूचना देने वाले व्यक्ति को अवैध गतिविधि की जानकारी विभाग तक पहुंचानी है, तो शिकायत को उचित अधिकारी तक पहुंचाने की व्यवस्था पारदर्शी और सुगम होना चाहिए। यहां सवाल व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही का है। यदि कोई सूचना गंभीर प्रकृति की है तो उसे किस अधिकारी तक, किस माध्यम से और कितने समय में पहुंचाया जाता है, इसकी स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है।
ब्लैक में शराब से सरकारी खजाने को नुकसान
अवैध रूप से शराब की बिक्री का असर केवल कानून के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहता। यदि शराब की बिक्री वैध लाइसेंस और निर्धारित प्रक्रिया के बाहर होती है तो शासन को मिलने वाले आबकारी राजस्व पर भी विपरीत असर पड़ता है। यही वजह है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई आबकारी विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक कथित रूप से ब्लैक में शराब बिकती रहती है और विभाग को इसकी जानकारी भी मिलती रहती है, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सूचना के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
अवैध शराब बिक्री की सूचना आबकारी अमले तक पहुंचाई गई, लेकिन आरोप है कि शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय मामले को नजरअंदाज कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि विभाग को अवैध शराब बिक्री की जानकारी दी जा रही है, तो मौके पर जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
पुष्पा राज' स्टाइल में संरक्षण?
अवैध शराब के कारोबार को लेकर अब यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं कारोबारियों को 'पुष्पा राज' स्टाइल में किसी का संरक्षण तो हासिल नहीं है? हालांकि संरक्षण के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन लगातार कार्रवाई नहीं होने से संदेह जरूर गहराता जा रहा है।
सरकारी राजस्व को नुकसान
अवैध शराब की बिक्री से न केवल नियम-कानून की धज्जियां उड़ने का आरोप है, बल्कि इससे सरकार को मिलने वाले आबकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचता है। वैध तरीके से बिक्री नहीं होने पर सरकारी खजाने को राजस्व का नुकसान होना स्वाभाविक है।
अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग डाट की पुल, लक्ष्मणपुरा और राम मंदिर ब्रिज के नीचे कथित अवैध शराब बिक्री की जांच करता है या नहीं। यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो जिम्मेदारों और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों पर कार्रवाई कब होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
