युवा नेता सोहेल काजी ने अल्पसंख्यक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दिल्ली में पेश की दावेदारी, इमरान प्रतापगढ़ी से मुलाकात कर रखा पक्ष, छात्र जीवन से कांग्रेस के सक्रिय सदस्य के रूप में कर रहे काम
रतलाम। मध्यप्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। इसी क्रम में रतलाम के युवा कांग्रेस नेता सोहेल काजी ने प्रदेश अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी से मुलाकात की और उनके समक्ष अपनी दावेदारी रखी।
रतलाम के रहने वाले सोहेल काजी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी को अपने लंबे संगठनात्मक अनुभव और कांग्रेस के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) में महासचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा यूथ कांग्रेस में भी संगठन के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया है। इसके पहले काज़ी ने दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी मुलाक़ात कर अपनी दावेदारी को लेकर चर्चा की थी।
काजी ने बताया कि वे कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग में प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वहीं वर्ष 2023 से 2025 तक कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाते हुए पार्टी के लिए लगातार काम किया। वर्तमान में भी वे कांग्रेस संगठन के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

दावेदारी के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से सीधा संपर्क
प्रदेश अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर इमरान प्रतापगढ़ी से हुई मुलाकात को सोहेल काजी की राजनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने मुलाकात के दौरान स्पष्ट रूप से मध्यप्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की और संगठन के विभिन्न स्तरों पर अपने अनुभव को दावेदारी का आधार बताया।
काजी ने राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष कहा कि छात्र संगठन से लेकर यूथ कांग्रेस, ब्लॉक संगठन और अल्पसंख्यक विभाग तक अलग-अलग जिम्मेदारियों में काम करने के कारण उन्हें संगठन की कार्यप्रणाली और जमीनी राजनीति का अनुभव है। साथ ही वे लंबे समय से कांग्रेस की विचारधारा और संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से पुराने संबंध भी दावेदारी की ताकत
सोहेल काजी की दावेदारी का एक महत्वपूर्ण पक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से उनके पुराने राजनीतिक एवं पारिवारिक संपर्क को भी माना जा रहा है। उनके समर्थकों के अनुसार काजी के दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, कांतिलाल भूरिया, जीतू पटवारी और विक्रांत भूरिया सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं से पुराने और करीबी संबंध रहे हैं।
काजी परिवार का कांग्रेस से लंबे समय से जुड़ाव रहा है, जिसके चलते पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनका पारिवारिक संपर्क भी पुराना बताया जाता है। संगठन के अलग-अलग स्तरों पर काम करने के साथ वरिष्ठ नेतृत्व के साथ संवाद और संपर्क को भी उनकी राजनीतिक दावेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

काजी परिवार की कांग्रेस में पुरानी राजनीतिक विरासत
सोहेल काजी की राजनीतिक दावेदारी को उनके परिवार की कांग्रेस से जुड़ी पुरानी राजनीतिक विरासत भी मजबूती देती है। उनके दादा काजी खुर्शीद अली कांग्रेस से जुड़े रहे और नगर निगम में पार्षद एवं नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। परिवार की ओर से स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है।
वहीं उनके बड़े भाई वासिफ काजी रतलाम में एनएसयूआई अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने यूथ कांग्रेस में प्रदेश उपाध्यक्ष और शहर कांग्रेस में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली है। यानी काजी परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ संगठन में काम करने का अनुभव भी लंबे समय से रहा है।

अल्पसंख्यक समाज और कांग्रेस संगठन के बीच सेतु बनने की क्षमता
प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए किसी भी चेहरे के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को सक्रिय करने के साथ अल्पसंख्यक समाज के बीच कांग्रेस की पकड़ को मजबूत करना होगी। ऐसे में सोहेल काजी की दावेदारी को उनके समर्थक इसी नजरिए से मजबूत मान रहे हैं।
काजी के पास एक ओर युवा कार्यकर्ताओं से संवाद और दूसरी ओर संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव है। यही संयोजन उन्हें प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी के लिए दूसरे संभावित दावेदारों के बीच अलग पहचान देता है।

युवा चेहरा और संगठनात्मक अनुभव पर जोर
सोहेल काजी की दावेदारी में युवा नेतृत्व, संगठनात्मक अनुभव, जमीनी सक्रियता और पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से संपर्क प्रमुख आधार के रूप में सामने आए हैं। छात्र राजनीति से लेकर यूथ कांग्रेस, ब्लॉक संगठन और अल्पसंख्यक विभाग तक जिम्मेदारियां निभाने का अनुभव उन्हें प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी के लिए दावेदारों की कतार में अलग पहचान देता है।
अब प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व को करना है। प्रदेश के कई अन्य अनुभवी नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी से दावेदारी के लिए मुलाकात करने और अपना राजनीतिक व संगठनात्मक पक्ष मजबूती से रखने से सोहेल काजी ने प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में अपनी सक्रिय दावेदारी स्पष्ट कर दी है।

