शांतिलाल वर्मा ने फिर उड़वा ली अपनी खिल्ली, चौपाटी के दुकानदारों ने किया कांग्रेस झण्डे का बहिष्कार, महापौर ने फिर दिया आश्वासन
रतलाम। दो बत्ती पर लगने वाली चौपाटी को हटाने की नगर निगम की कार्रवाई के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई। यहाँ चौपाटी के दुकानकारो के समर्थन में निगम में ज्ञापन देने पहुंचे शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा का अधिकांश दुकानदारों ने विरोध करते हुए ज्ञापन दे दूरी बना ली। दुकानदारों का कहना था कि हम किसी पार्टी के बैनर तले यह ज्ञापन नहीं दे रहे ओर इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसके बाद कांग्रेस ने कुछ दुकानदारों के साथ ज्ञापन दिया और कांग्रेस झंडे का विरोध करने वाले दुकानदारों ने अलग से ज्ञापन देकर अपनी मांग रखी। इस दौरान शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा ने एक बार फिर देर से जागकर अपनी खिल्ली उड़वा ली। इसके पहले पीएम आवास मल्टी को लेकर भी वर्मा ने 5 दिन बाद जागकर अपनी खिल्ली उड़वाई थी।

दरअसल मंगलवार को निगम की टीम तीन जेसीबी और भारी अमले के साथ मौके पर पहुंची और करीब 50 से अधिक ठेला एवं दुकान संचालकों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कार्रवाई के दौरान कांग्रेस नेत्री यास्मीन शेरानी ओर मयंक जाट दुकानदारों के समर्थन में सामने आए और कार्यवाही का विरोध करते हुए इसे रुकवाया।
वही इस मामले को लेकर बुधवार सुबह शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा और काग्रेसियो ने नगर निगम का घेराव कर प्रदर्शन किया। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान ही चौपाटी के दुकानदारों के बीच दो गुट नजर आए। अधिकांश दुकानदारों ने प्रदर्शन में कांग्रेस का झंडा लाए जाने का विरोध किया और शांतिलाल वर्मा के साथ दिए जाने वाले ज्ञापन से दूरी बना ली। बाद में इन दुकानदारों ने अलग से जाकर अपना ज्ञापन सौंपा।

पीएम आवास मल्टी में भी दिखा था ऐसा ही घटनाक्रम
शांतिलाल वर्मा की राजनीतिक सक्रियता को लेकर अब उनके विरोधी सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले पीएम आवास मल्टी को खाली कराने के मामले में भी उन पर देरी से सक्रिय होने के आरोप लगे थे। आरोप है कि कार्रवाई के करीब पांच दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश की गई।
अब चौपाटी मामले में भी निगम की कार्रवाई और जगह टूटने के बाद प्रदर्शन करने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जब कार्रवाई शुरू हुई, उस समय विरोध की जगह कार्रवाई के बाद प्रदर्शन क्यों किया गया? वही एक बात तो ये साबित होती हे कि पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान दुकानदारों ने कांग्रेस नेता मयंक जाट और यास्मीन शेरानी के द्वारा किए गए समर्थन का विरोध नहीं किया लेकिन जैसे ही शांतिलाल वर्मा द्वारा इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश की गई। उनका विरोध शुरू हो गया।
दुकानदारों ने ही कर दिया किनारा
चौपाटी के दुकानदारों के बीच से ही कांग्रेस के झंडे का विरोध सामने आना इस पूरे प्रदर्शन का सबसे चर्चित पहलू रहा। प्रदर्शन में शामिल कुछ दुकानदारों ने साफ तौर पर झंडे से आपत्ति जताई और ज्ञापन से भी दूरी बना ली। इसके बाद उन्होंने अलग जाकर नगर निगम को अपना ज्ञापन सौंपा।
ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस मुद्दे को दुकानदारों के समर्थन के नाम पर राजनीतिक रूप दिया गया, उसी मुद्दे पर दुकानदारों का एक वर्ग प्रदर्शन से अलग क्यों हो गया? फिलहाल चौपाटी हटाने की कार्रवाई के साथ-साथ इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है।
