पैराडाइज वैली में पिकनिक बदली मातम में, 3 लोगों की डूबने से मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल, जिम्मेदारों की मॉक ड्रिल बनी दिखावा

पैराडाइज वैली में पिकनिक बदली मातम में, 3 लोगों की डूबने से मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल, जिम्मेदारों की मॉक ड्रिल बनी दिखावा

रतलाम। कागजों पर मॉक ड्रिल, बैठकों में सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे और हादसों के बाद जांच के भरोसे... पैराडाइज वैली की दर्दनाक घटना ने जिम्मेदारों की तैयारियों का आईना सामने रख दिया है। जिस जल क्षेत्र में जावरा के त्रिमूर्ति स्कूल के बच्चे ओर शिक्षक पिकनिक मनाने पहुंचे थे, वहीं तीन जिंदगियां पानी में समा गईं। हादसे में दो शिक्षकों और एक छात्र की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची का रेस्क्यू कर स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया। अब सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, बल्कि उन सुरक्षा इंतजामों का है जिनके नाम पर जिम्मेदार विभाग अपनी तैयारियों का दावा करते रहे हैं। ओर मॉकड्रिल सहित नदी तालाबों में उतरकर दिखावा करते हैं। लेकिन मौके पर इस प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती हैं।

जानकारी के अनुसार हादसा सागोद रोड स्थित सावलिया रुंडी की पैराडाइज वैली में हुआ। स्कूल से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का दल पिकनिक के लिए यहां पहुंचा था। इस दौरान वे डूब गए। हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई और बच्चों में दहशत फैल गई।
स्थानीय लोगों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए रेस्क्यू शुरू किया। सभी को पानी से बाहर निकाला। वही इस दौरान एक अन्य बच्ची को भी बचाया गया और  पत्रकार दिलजीत सिंह मान और नवीन टाक ने बाइक से जिला चिकित्सालय पहुंचाया। बच्ची का उपचार किया गया और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।


सुरक्षा के दावों की खुली पोल?
तीन मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों को पिकनिक पर ले जाने से पहले स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षा का आकलन क्यों नहीं किया? क्या स्थल का निरीक्षण किया गया था? क्या पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी बच्चों की निगरानी कर रहे थे? क्या मौके पर रेस्क्यू उपकरण और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था मौजूद थी?
इन सवालों का जवाब अब स्कूल प्रबंधन के साथ प्रशासन को भी देना होगा।
मॉक ड्रिल में तैयारी, असल हादसे में स्थानीय लोगों पर भरोसा?
आपदा और जल हादसों से निपटने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाती हैं। लेकिन पैराडाइज वैली में जब वास्तविक हादसा हुआ तो बचाव के लिए सबसे पहले स्थानीय लोग आगे आए। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जिम्मेदार विभागों की मॉक ड्रिल आखिर किस काम की, अगर वास्तविक घटना के समय तत्काल प्रभावी रेस्क्यू व्यवस्था ही नजर न आए?
पिकनिक स्पॉट नहीं तो रोकथाम के इंतजाम कहां?
प्रशासन के अनुसार पैराडाइज वैली आधिकारिक पिकनिक स्पॉट नहीं है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर लगातार प्रचार के कारण यहां लोगों की आवाजाही बढ़ रही है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि संभावित खतरे वाले स्थानों पर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड, निगरानी और रोकथाम के इंतजाम किए जाएं।
तीन मौतों के बाद अब सिर्फ जांच नहीं, बल्कि यह भी तय होना जरूरी है कि किसकी जिम्मेदारी थी, सुरक्षा व्यवस्था कहां थी और मॉक ड्रिल के बावजूद वास्तविक हादसे में रेस्क्यू सिस्टम क्यों नाकाम नजर आया?