दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद भी नहीं जागा रतलाम! जर्जर भवन पर नोटिसों की ‘नौटंकी’, हादसे का इंतजार कर रहा निगम-प्रशासन? शासकीय कर्मचारी ही उड़ा रही आदेशों का मखौल
रतलाम। दिल्ली के सत्य निकेतन में जर्जर भवन गिरने से हुए हादसे ने देशभर में भवनों की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे हादसों के बाद प्रशासन कुछ समय के लिए सक्रिय नजर आता है, जर्जर भवनों का सर्वे, नोटिस और कार्रवाई की बातें होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद वही कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है। दिल्ली में अब जर्जर भवनों को चिन्हित कर कार्यवाही शुरू की गई है।

इस प्रकार रतलाम में भी कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है। बताया जा रहा है जिस जर्जर भवन पर कई बार नोटिस चिपकाया गया है। वे एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और अपने पद का दबाव बनाकर कार्यवाही करने से रोकती है। वही अब बड़ा सवाल यह है कि निगम सिर्फ नोटिस देने की नौटंकी करेगा या कोई प्रभावी कार्यवाही कर जर्जर भवन को तोड़, भविष्य में होने वाले हादसे से रोकेगा।

दरअसल शहर के बाईजी का वास, वार्ड क्रमांक 39 में एक जर्जर भवन को लेकर स्थानीय रहवासी लंबे समय से चिंतित हैं। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि भवन की हालत लगातार खराब हो रही है और इसके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है। इसी खतरे को देखते हुए रहवासियों ने नगर निगम के साथ-साथ 181 सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की है।

निगम ने खुद माना भवन जर्जर, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
इस मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि नगर निगम द्वारा जारी नोटिस में ही भवन की जर्जर स्थिति का उल्लेख किया गया है। 15 जून 2026 को जारी पत्र क्रमांक 74/लो.नि.वि./2026 में निगम ने लिखा कि पूर्व में भी संबंधित को जर्जर भवन खाली करने के लिए सूचना पत्र जारी किया गया था, लेकिन आज दिनांक तक भवन खाली नहीं किया गया।
नोटिस में भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए उसे खाली किया जाना आवश्यक बताया गया है। निगम ने तत्काल भवन खाली करने के निर्देश दिए और यह भी चेतावनी दी कि भवन खाली नहीं किए जाने की स्थिति में नगर निगम द्वारा नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी तथा इसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित की होगी।
अब सवाल यह है कि जब नगर निगम अपने ही नोटिस में भवन को जर्जर और खाली करने योग्य मान चुका है, तो फिर आज तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या निगम कमिश्नर अनिल भाना दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे को दोहराना चाहता है?

नोटिस के बाद भी खतरा बरकरार
बताया जा रहा है कि भवन किसी शासकीय शिक्षिका से संबंधित है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भवन की स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों के बीच इस बात को लेकर डर है कि यदि भवन का कोई हिस्सा अचानक गिरता है तो आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की जान खतरे में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार शिकायत किए जाने पर संबंधित पक्ष की ओर से भी अन्य लोगों के खिलाफ शिकायतें की जाती हैं। लोगों का यह भी आरोप है कि अधिकारियों के मौके पर पहुंचने पर विवाद की स्थिति पैदा होती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का पक्ष भी लिया जाना शेष है।
बड़े हादसे के बाद ही कुछ दिन जागता है प्रशासन
रतलाम में यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी संभावित खतरे को लेकर कार्रवाई सवालों के घेरे में हो। शहर में अक्सर देखने को मिलता है कि कहीं बड़ा हादसा होने के बाद अधिकारी अचानक सक्रिय होते हैं। कुछ दिनों तक अभियान चलाया जाता है, जर्जर भवनों का निरीक्षण होता है, नोटिस जारी होते हैं और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं।
लेकिन जैसे-जैसे हादसे की चर्चा कम होती है, कार्रवाई भी धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चली जाती है। यही सवाल इस मामले में भी खड़ा हो रहा है कि क्या नगर निगम और जिला प्रशासन किसी बड़े घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं?
दिल्ली के सत्य निकेतन जैसे हादसे यह साफ कर चुके हैं कि जर्जर भवन को लेकर जारी किया गया नोटिस महज कागज का टुकड़ा नहीं होना चाहिए। जब किसी भवन को असुरक्षित माना जाता है तो उसके आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
हादसा होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी?
बाईजी का वास के रहवासियों की शिकायत और नगर निगम के नोटिस के बावजूद यदि जर्जर भवन को लेकर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होती और भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करने का सवाल उठेगा।
आखिर नगर निगम और जिला प्रशासन कब तक नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानते रहेंगे?
रतलाम में कार्रवाई हादसे से पहले होगी या हादसे के बाद?
क्या प्रशासन जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति की जांच कर समय रहते खतरा खत्म करेगा, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद कुछ दिनों की कार्रवाई कर मामला फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
यही सवाल फिलहाल बाईजी का वास के रहवासियों के साथ-साथ पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी खड़ा है।
