इधर प्रभारी मंत्री आदिवासी बच्चों के साथ कर रहे थे भोजन, उधर बच्चे धो रहे थे बर्तन सैलाना में विजय शाह शिक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं का कर रहे थे बखान, रावटी के स्कूल में बिना शिक्षक के पढ़ने को मजबूर बच्चे; जनजातीय कार्य विभाग की लापरवाही उजागर, एडीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
रतलाम। जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे दावों की जमीनी हकीकत उस समय सामने आई गई जब एक तरफ जुले के प्रभारी मंत्री विजय शाह सैलाना के कन्या छात्रावास में आदिवासी बच्चों के साथ भोजन कर शिक्षा की गुणवत्ता, बेहतर सुविधाओं और स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था करने की बात कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर इसी आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के रावटी के पास एक प्रायमरी स्कूल के बच्चे बिना शिक्षक के पढ़ने को मजबूर थे। इतना ही नहीं, स्कूल में मध्यान्ह भोजन के बाद बच्चे खुद ही बर्तन धोते नजर आए। एक ही क्षेत्र में शिक्षा और व्यवस्थाओं की इन दो तस्वीरों ने जनजातीय कार्य विभाग के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर उजागर कर दिया है।

दरअसल सैलाना विधानसभा के रावटी क्षेत्र के कुंवरपाड़ा स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 5वी तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए महज दो शिक्षक पदस्थ हैं। इनमें से एक शिक्षक ट्रेनिंग पर गये थे, जबकि दूसरे शिक्षक के बीमार होने के कारण अवकाश पर रहने से स्कूल में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं था। ऐसे में स्कूल पहुंचे बच्चे बिना शिक्षक के खुद ही पढ़ाई करने को मजबूर थे। स्थिति यह थी कि छोटे-छोटे बच्चे अपनी किताबें खोलकर खुद पढ़ रहे थे, वहीं कुछ बच्चे अपने साथियों को पढ़ाते भी नजर आए। शिक्षकों की अनुपस्थिति में बच्चों को मध्यान्ह भोजन के बर्तन भी खुद ही धोने पड़े। बच्चों ने बताया कि वे खुद रोज अपने खाने के बर्तन धोते हैं।

प्रभारी मंत्री का एक तरफ व्यवस्थाओं का बखान, दूसरी ओर स्कूल में शिक्षक तक नहीं
प्रभारी मंत्री विजय शाह सैलाना के कन्या छात्रावास में आदिवासी बच्चों के साथ भोजन कर रहे थे। इस दौरान शिक्षा और स्कूलों में बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के साथ शिक्षकों की उपलब्धता की बात की जा रही थी। लेकिन रावटी के कुंवरपाड़ा स्कूल में दो शिक्षकों की अनुपस्थिति और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। आदिवासी क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा की ऐसी स्थिति ने जनजातीय कार्य विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वही इस मामले में अधिकारी प्रियंका राय की लापवाही हमेशा की तरह सामने आया, उनको इस मामले से अवगत कराने के लिए फोन किया तो हमेशा की तरह फोन नहीं उठाया गया।

जनशिक्षक को जानकारी, फिर भी नहीं हुई वैकल्पिक व्यवस्था
विद्यालय में दोनों शिक्षकों के अनुपस्थित रहने के बावजूद वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था नहीं की गई। मामले में जनशिक्षक गोपाल टांक का कहना था कि वे भोपाल धरने पर हु और स्कूल के शिक्षक ने उन्हें छुट्टी पर रहने की जानकारी दी थी, लेकिन लिखित सूचना नहीं दी गई, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि जब स्कूल में एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं था, तो बच्चों की पढ़ाई सुचारू रखने के लिए जिम्मेदारी किसकी थी।

संकूल प्राचार्य ने शिक्षक भेजा, संबंधित शिक्षक को नोटिस
मामले से शासकीय सांदीपनि विद्यालय रावटी के प्राचार्य अमरसिंह भाभर को अवगत कराया गया। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल में शिक्षक भेजने की व्यवस्था की और संबंधित शिक्षक को नोटिस जारी किया। हालांकि, स्कूल में शिक्षक की व्यवस्था करीब आधी पाली बीतने के बाद दोपहर लगभग 2:30 बजे की गई। तब तक बच्चे बिना शिक्षक के ही स्कूल में पढ़ने को मजबूर रहे।
एडीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
मामले में प्रशासन ने भी संज्ञान लेते हुए एडीएम ब्रजेन्द रावत ने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सामने आई इस स्थिति ने जनजातीय कार्य विभाग की महिला अधिकारी प्रियंका राय की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए क्या व्यवस्थाएं की जाती हैं। वही इस मामले के उजागर होने के बाद प्रभारी मंत्री विजय शाह की भी जमकर किरकिरी हुई है। मामले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता सुजीत उपाध्याय का कहना है कि मंत्री जी कभी कभी जिले मैं आते है जिले की कोई जानकारी नहीं है उन्हें सिर्फ फोटो खिंचवाने होते हे ओर दिखावा करना।
