आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा का गिरता स्तर: 5 कक्षाओं में 2 शिक्षक, दोनों गेर हाजिर, बिना शिक्षक के चल रही कक्षाएं,बच्चे खुद पढ़ने को मजबूर
रतलाम। रतलाम जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रावटी क्षेत्र के कुंवरपाड़ा स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 5वीं तक के बच्चे इन दिनों शिक्षक के बिना पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल में पदस्थ दो शिक्षक अलग-अलग कारणों से अवकाश पर हैं। ऐसे में स्कूल में बच्चे तो पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाला कोई शिक्षक मौजूद नहीं है। मजबूरन छात्र खुद ही शिक्षक बनकर बच्चों को पढ़ा रहे हे।जानकारी के अनुसार विद्यालय में दो शिक्षक पदस्थ हैं। इनमें से एक शिक्षक प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) पर हैं, जबकि दूसरे शिक्षक के बीमार होने के कारण अवकाश पर रहने से स्कूल में एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है। इसके चलते कक्षा 1 से 5वीं तक के बच्चे स्कूल पहुंचकर खुद ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वही शिक्षकों की अनुपस्थिति में बच्चे खुद बर्तन धोते नजर आये।

स्कूल में शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षक की मौजूदगी और मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन यहां बच्चे स्कूल पहुंचने के बाद अपनी किताबें खोलकर बिना शिक्षक के खुद ही पढ़ते नजर आ रहे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि शिक्षकों की अनुपस्थिति के बावजूद वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था के लिए किसी बड़े अधिकारी को सूचना दिए जाने की बात भी सामने नहीं आई है। सवाल उठता है कि जब दोनों शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं तो स्कूल में पढ़ाई सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की जिम्मेदारी किसकी है? मामले को लेकर जनशिक्षक का कहना हे कि वे भोपाल में है और स्कूल के शिक्षक ने उन्हें बताया था कि वे छुट्टी पर रहेंगे लेकिन मुझे लिखित में नहीं दिया, इसलिए मैंने कोई व्यवस्था नहीं की।

आदिवासी क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़?
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र रावटी में ऐसे क्षेत्रों में सरकारी स्कूल ही बड़ी संख्या में बच्चों की शिक्षा का प्रमुख आधार हैं। ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के बच्चे बेहतर शिक्षा की उम्मीद में सरकारी स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में यदि प्राथमिक स्तर पर ही बच्चे शिक्षक के अभाव में खुद पढ़ने को मजबूर होंगे तो उनकी शिक्षा की नींव किस तरह मजबूत होगी, यह बड़ा सवाल है।
सरकार और शिक्षा विभाग लगातार स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने, बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा को मजबूत करने की बात करते हैं। लेकिन कुंवरपाड़ा स्कूल की स्थिति इन दावों की जमीनी निगरानी पर सवाल खड़े करती है।
वही दोनों शिक्षक अनुपस्थित होने की जानकारी मिलने के बाद बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई इसको लेकर भी बड़ी लापरवाही सामने आई है।
आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा की बुनियाद मजबूत करने के दावों के बीच कुंवरपाड़ा स्कूल की यह तस्वीर विभागीय व्यवस्था और निगरानी दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मामले को लेकर जब शासकीय सांदीपनि विद्यालय रावटी। प्राचार्य अमरसिंह भाभर को अवगत कराया तो उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल में शिक्षक को भेजा। वही संबधित शिक्षक को नोटिस जारी किया गया है। वही आधी पाली होने के बाद करीब 2.30 स्कूल में अन्य शिक्षक को भेजा।
