आखिर ऋषि भैया ने कैसे दे दिया 5 हजार स्क्वायर फीट का बेशकीमती एरिया! वो भी बिना किसी शासकीय शुल्क के? पोलो ग्राउंड समीप की बेशकीमती जमीन पर कब्जा या मौखिक अनुमति से कारोबार? छोटे दुकानदारों पर स्पॉट फाइन की सख्ती क्यों

आखिर ऋषि भैया ने कैसे दे दिया 5 हजार स्क्वायर फीट का बेशकीमती एरिया! वो भी बिना किसी शासकीय शुल्क के?  पोलो ग्राउंड समीप की बेशकीमती जमीन पर कब्जा या मौखिक अनुमति से कारोबार? छोटे दुकानदारों पर स्पॉट फाइन की सख्ती क्यों

रतलाम। नगर निगम के राजस्व विभाग ऋषि भैया अपने कामकाम को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं, कभी सड़क पर ठेले लगाने वाले पर सख्ती तो कभी फल सभी बेचने वाले गरीबों लोगों के तराजू बात लेकर नियम की सख्ती दिखाने वाले नगर निगम में रंगा बिल्ला के नाम से मशहूर ये साहब ने एक बार फिर अपने नए कारनामे से सुर्खियों में है । ऋषि भैया ने करोड़ो की जमीन के हिस्से को बिना सरकारी रसीद काँटे मौखिक अनुमति देकर खेल कर दिया।  ओर जब मामला मिडिया के पास पहुंचा तो भैया जानकरी नहीं होने ओर सिर्फ हर बार लगने का बहाना करते नजर आये।

मामला पोलो ग्राउंड के समीप स्थित करीब 5 हजार स्क्वायर फीट के बेशकीमती क्षेत्र का है, जहां गन्ने के थोक विक्रेताओं को कथित तौर पर बिना किसी शासकीय शुल्क और रसीद के कारोबार करने की मौखिक अनुमति दे दी गई। बताया जा रहा है कि यहां दो बड़े ट्रक खड़े कर शहर छोटे दुकानदारों को गन्ने की सप्लाई की जा रही थी। इतना ही नहीं, मौके पर एक टोल कांटा भी लगाया गया था, जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।

इस पूरे मामले में नगर निगम राजस्व विभाग के अधिकारी ऋषि पंड्या का नाम सामने आ रहा है। जब गन्ने का कारोबार करने वाले व्यक्ति से इस संबंध में पूछा गया तो उसका कहना था कि वह ऋषि भैया से पूछकर ही माल उतार रहे हैं और उन्होंने ही यहां से माल बेचने की बात कही थी। जब सवाल किया कि कोई सरकारी शुक्ल या रशीद दी गई तो वे ऋषि भैया से बात हो गई कहकर चले गए। वही दिन भर व्यापार करने और अपनी पोल खुलने के बाद देर रात मामले में लीपापोती करते हुए निगम की टीम ने यहां से सामना हटवा दिया गया। 

अब सवाल यह है कि आखिर नगर निगम की जमीन पर करीब 5 हजार स्क्वायर फीट का इतना बड़ा क्षेत्र किस अधिकार से इस्तेमाल करने दिया गया? क्या इसके लिए कोई अनुमति जारी हुई थी? क्या नगर निगम की रसीद काटी गई या फिर सिर्फ मौखिक सहमति से ही बेशकीमती सरकारी जमीन कारोबार के लिए उपलब्ध करा दी गई?

छोटे दुकानदारों पर नियमों का डंडा, बड़े कारोबारियों पर मेहरबानी क्यों?

नगर निगम का स्पॉट फाइन दल रोजाना शहर में छोटे ठेले लगाने वाले, फल बेचने वाले और सड़क किनारे ढेरी लगाकर 100-200 रुपये कमाने वाले गरीब दुकानदारों पर सख्ती  और दबंगई दिखाकर। कार्रवाई करता है। कई बार उनका सामान जब्त कर लिया जाता है और नियमों का हवाला देकर 500 से 2000 रुपये तक का चालान काटा जाता है। कुछ मामलों में दुकानदारों को उनका सामान वापस मिलने में भी परेशानी होती है।

लेकिन दूसरी ओर, यदि किसी बड़े कारोबारी को करीब 5 हजार स्क्वायर फीट का क्षेत्र ट्रकों से माल उतारने और थोक कारोबार करने के लिए बिना शासकीय शुल्क उपलब्ध कराया जाता है, तो यह दोहरा रवैया क्यों? क्या नगर निगम के नियम केवल गरीब ठेले वालों के लिए ही हैं?

ऋषि पंड्या का जवाब भी सवालों के घेरे में

जब राजस्व विभाग के अधिकारी ऋषि पंड्या से पूछा गया कि उक्त स्थान के लिए कितने रुपये की रसीद काटकर जगह उपलब्ध कराई गई है, तो उनका कहना था कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि वहां ट्रक से माल उतारा जा रहा है। हर साल गन्ने का कारोबार लगता था, इसलिए उन्होंने कह दिया था। यदि वहां ट्रक से माल उतारा जा रहा है तो यह गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और वे मामले को दिखवाएंगे।

अब बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी को यह जानकारी ही नहीं थी कि वहां किस प्रकार की गतिविधि संचालित हो रही है, तो फिर जगह इस्तेमाल करने की मौखिक अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी बिना अनुमति, बिना शुल्क और बिना रसीद के सरकारी जमीन किसी को भी इस्तेमाल करने दे सकते हैं?


गौरतलब है कि पहले भी नगर निगम के ऋषि पंड्या के काम को लेकर जनकर हंगामा हुआ हैं और निगम कमिश्नर से लेकर महापौर तक इसकी शिकायत हुई थी। एक बार तो कालेज रोड पर कपड़े का ठेला लगाने वाले बुजुर्ग की लड़कियों ने भी सड़क पर  निगम कमिश्नर के केबिन में ऋषि ओर इनकी टीम पर अभद्र व्यवहार करने सहित अन्य आरोप लगाये थे जो मामला भी काफी सुर्खियों में रहा था।