पृथ्वी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के घटिया निर्माण की फिर खुली पोल जांच के बाद दोबारा बनाया गया 50 फीट का हिस्सा भी 20 दिन में खराब, सीमेंट की परतें उखड़ने लगीं

पृथ्वी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के घटिया निर्माण की फिर खुली पोल जांच के बाद दोबारा बनाया गया 50 फीट का हिस्सा भी 20 दिन में खराब, सीमेंट की परतें उखड़ने लगीं

रतलाम। जावरा फाटक अंडरब्रिज से सेजावता फंटा तक करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए फोरलेन सड़क निर्माण में एक बार फिर गंभीर खामियां सामने आई हैं। इंदौर की कंपनी पृथ्वी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित सड़क का वह करीब 50 फीट हिस्सा, जिसे जांच के बाद उखाड़कर दोबारा बनाया गया था, महज 20 दिन के भीतर ही खराब होने लगा है। सड़क की ऊपरी सीमेंट परतें जगह-जगह से निकलने लगी हैं, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले में ठेकेदार कंपनी के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। वही 17 करोड़ के फोरलेन में सीमेंट वाली रोड पर कई जगह वापस केमिकल का लेप लगाकर सही किया जा रहा हैं जो इस कंपनी के घटिया निर्माण ओर pwd अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा हैं। उल्लेखनीय है कि जावरा फाटक-सेजावता फोरलेन सड़क निर्माण में घटिया गुणवत्ता को लेकर coverstory 24 के द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित की गई थी और इस संबंध में जिम्मेदारो के अवगत भी कराया गया था। 

गौरतलब है कि जावरा फाटक-सेजावता फोरलेन निर्माण में घटिया गुणवत्ता को लेकर क्षेत्रीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने लगातार शिकायतें की थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए MSME मंत्री चैतन्य काश्यप ने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को अवगत कराया था, जिसके बाद विभाग ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। जांच दल रतलाम पहुंचा और सड़क के दो स्थानों से कोर कटिंग कर नमूने लिए गए।


हालांकि जांच प्रक्रिया के दौरान भी विवाद खड़ा हो गया था। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेता शेरू पठान ने आरोप लगाया था कि जहां सड़क क्षतिग्रस्त और धंसी हुई थी, वहां से सैंपल नहीं लिए गए। आरोप है कि PWD के कार्यपालन यंत्री महेंद्र चौहान की मौजूदगी में अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति वाले हिस्सों से ही सैंपलिंग करवाई गई। इतना ही नहीं, फोरलेन के डामर हिस्से से कोई नमूना नहीं लिया गया, जबकि शिकायतें वहां भी सामने आई थीं।जांच के बाद जब नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए तो ठेकेदार कंपनी ने सड़क के खराब हिस्सों को मशीनों से उखाड़कर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया था। उस समय भी सवाल उठे थे कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही सुधार कार्य क्यों कराया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि जावरा फाटक-सेजावता फोरलेन सड़क निर्माण में घटिया गुणवत्ता को लेकर cover story 24 के द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित की गई थी और इस संबंध में जिम्मेदारो के अवगत भी कराया गया था। लगातार उठ रहे सवालों और जांच टीम की कार्रवाई के बाद आखिरकार ठेकेदार हरकत में आ गया। जांच के दौरान निर्माण कार्य में कई खामियां सामने आने के बाद MSME मंत्री चैतन्य काश्यप ने इस सड़क की जांच के लिए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को अवगत कराया था। इसके बाद पांच सदस्यीय जांच दल रतलाम पहुंचा और सड़क के दो स्थानों से कोर कटिंग कर नमूने लिए गए थे।
हालांकि जांच प्रक्रिया के दौरान भी कई सवाल खड़े हुए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री महेंद्र चौहान ने सड़क के खराब हिस्सों की बजाय बेहतर दिखाई देने वाले हिस्सों से सैंपलिंग करवाई। भाजपा नेता शेरू पठान ने भी मौके पर पहुंचकर जहां सड़क धंस चुकी थी और निर्माण में खामियां स्पष्ट दिखाई दे रही थीं, वहां से नमूने लेने की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों ने उनकी आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया।


अब जबकि सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं, ठेकेदार कंपनी द्वारा सड़क के खराब हिस्सों को मशीनों से उखाड़कर दोबारा निर्माण कार्य कराया जा रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जांच के बाद जिस करीब 50 फीट हिस्से को उखाड़कर दोबारा बनाया गया था, वह भी महज 20 दिन के भीतर खराब होने लगा है। सड़क की सीमेंट कांक्रीट की परतें जगह-जगह से उखड़ रही हैं, जिससे निर्माण गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि इंदौर की पृथ्वी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए निर्माण कार्य में शुरू से ही गुणवत्ता की अनदेखी की गई है और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ठेकेदार को संरक्षण मिलता रहा। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की निष्पक्ष निगरानी की जाती तो करोड़ों रुपये की इस परियोजना में इतनी खामियां सामने नहीं आतीं।
उल्लेखनीय है कि जावरा फाटक अंडरब्रिज से सेजावता फंटा तक करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से 4.12 किलोमीटर लंबे फोरलेन का निर्माण किया गया है। इसमें आधा हिस्सा सीमेंट कांक्रीट तथा आधा डामर सड़क के रूप में बनाया गया है। निर्माण कार्य में लगातार सामने आ रही खामियों को लेकर क्षेत्रीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने शिकायतें की थीं, जिसके बाद मंत्री चैतन्य काश्यप ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंत्री स्तर पर जांच के आदेश दिए जाने के बावजूद स्थानीय स्तर पर मामले में लीपापोती की कोशिशें की जा रही हैं। यही कारण है कि खराब हिस्सों को जांच पूरी होने से पहले ही उखाड़कर सुधार कार्य शुरू कर दिया गया, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।