आदिवासी अंचल के स्कूलों की बदहाली: थाली से गायब खीर-हरी सब्जी, जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल एक कक्ष में लग रहीं पांच कक्षाएं, पीने के पानी और शौचालय तक की सुविधा नहीं, बच्चे खुद धो रहे अपनी थालियां

आदिवासी अंचल के स्कूलों की बदहाली: थाली से गायब खीर-हरी सब्जी, जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल एक कक्ष में लग रहीं पांच कक्षाएं, पीने के पानी और शौचालय तक की सुविधा नहीं, बच्चे खुद धो रहे अपनी थालियां

रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा के आदिवासी बहुल क्षेत्र बाजना विकासखंड में  शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। यहां प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार मध्यान्ह भोजन नहीं मिल रहा है। कही भोजन थाली से खीर और हरी सब्जी गायब है तो वहीं भोजन करने के बाद बच्चे मेडम के सामने अपनी थालियां खुद धोने को मजबूर हैं। इसके साथ ही शासकीय  विद्यालय की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। जर्जर भवन में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। एक ही कक्ष में पांच-पांच कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कहीं नियमित शिक्षक नहीं हैं तो कहीं विद्यालय अतिथि शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। कुछ स्कूलों में नियमित नियुक्ति तक नहीं होने की बात सामने आई है। विद्यालय में पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था नहीं है। बच्चों और शिक्षकों के लिए शौचालय की सुविधा भी

उपलब्ध नहीं है, जिससे रोजमर्रा की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
मध्यान्ह भोजन बनाने वाले स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष का कहना है कि समय पर राशि नहीं मिलने के कारण शासन के निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन बनाना संभव नहीं हो पा रहा है। इसी वजह से बच्चों को खीर, हरी सब्जी सहित अन्य पौष्टिक व्यंजन नहीं मिल रहे हैं।

ये हाल बाजना के ग्राम पंचायत मोलावा के प्राथमिक विद्यालय मकनपुरा सहित अन्य स्कूलों के हे।
ग्राम पंचायत मोलावा के सरपंच का कहना है कि उन्होंने कई बार विद्यालय के जर्जर भवन को लेकर संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विद्यालय में पदस्थ शिक्षिका का कहना है कि भवन की स्थिति और अन्य समस्याओं की जानकारी कई बार लिखित रूप से और विभागीय बैठकों में भी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मजबूरी में इसी जर्जर भवन में बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासी अंचल के स्कूलों की लगातार अनदेखी की जा रही है। यदि जल्द ही भवन, शिक्षकों और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य और शिक्षा के स्तर पर पड़ेगा।
इस संबंध में विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।