कलेक्टर कार्यालय तक गुंजी अवैध शराब की गूंज, आबकारी विभाग पर फिर उठे सवाल, जनसुनवाई में पहुचकर ग्रामीणों ने सुनाई आपबीती
रतलाम/जावरा। जिले में अवैध शराब बिक्री पर कार्यवाही के दावे खोखले नजर आ रहे हैं यहाँ सुस्त आबकारी विभाग की पोल उस समय खुल गई जब अवैध शराब बिक्री की गूंज कलेक्टर कार्यालय में गूंज उठी। अवैध शराब बिक्री को पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस और आबकारी विभाग पर गंभीर आरोप लगाये।

यहाँ अवैध शराब की शिकायत देख आबकारी विभाग के एक अधिकारी बगले झांकते हुए ग्रामीणों को ऐसे आश्वस्त कर रहे थे जैसे गलती से गांव में शराब की बोतल पहुंच गई या रास्ता भटक गई।
दरअसल मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में जावरा तहसील के ग्राम लसूड़िया जंगली के ग्रामीणों ने गांव में कथित रूप से चल रहे अवैध शराब कारोबार के खिलाफ कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से अवैध रूप से शराब की बिक्री की जा रही है। गांव के तालाब के पास कुछ असामाजिक तत्व खुलेआम शराब का क्रय-विक्रय कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के समीप गुमटी की आड़ में शराब का कारोबार संचालित हो रहा है, जिससे आसपास का माहौल खराब हो रहा है। ग्रामीणों ये भी आरोप लगाया कि शराब पीने के बाद कुछ लोग रास्ते से गुजरने वाले लोगों के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज करते हैं। इससे महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा गांव में भय का वातावरण बन गया है। वही गांव के लोग शराब पीकर अपने परिजनों से भी मारपीट करते हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अवैध शराब की सूचना पुलिस को भी कई बार दे चुके हैं लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो रही। गांव में करीब 10 जगह अवैध रूप से डायरी सिस्टम पर शराब की बिक्री हो रही हैं ओर आबकारी विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों ने जब अपना आवेदन दिया तो आबकारी विभाग से अधिकारी पुष्पराज सिंह चौहान पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की इस दौरान ग्रामीणों ने कई गंभीर आरोप लगाते हुए विभाग की मिलीभगत के आरोप लगाये। इस दौरान आबकारी अधिकारी पुष्पराज सिंह चौहान कार्यवाही करने की बात करते नजर आये ओर गांव में जाकर अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाने की बात कहते नजर आये।वही आबकारी अमला मंगलवार की शाम गांव में पहुंचा और ग्रामीणों द्वारा बताए गए घरों पर दबिश दी लेकिन वहां मोके पर कुछ नहीं मिला।वही सूत्रों का कहना है कि करीब एक हफ्ते से गांव में अवैध शराब बिक्री का विरोध हो रहा था। जिसको लेकर शराब माफिया ने आबकारी अमले के आने के पहले ही सारी शराब हटा दी।
