आदिवासियों के ज्ञापन ने ले लिया आंदोलन का रूप, धौलावड का पानी रोकने की चेतावनी के बाद कलेक्टर को सीढ़ियों पर बैठकर सुनना पड़ी बात, 2.30 घंटे तक कलेक्टर को बुलाने पर अड़े ग्रामीण

आदिवासियों के ज्ञापन ने ले लिया आंदोलन का रूप, धौलावड का पानी रोकने की चेतावनी के बाद कलेक्टर को सीढ़ियों पर बैठकर सुनना पड़ी बात, 2.30 घंटे तक कलेक्टर को बुलाने पर अड़े ग्रामीण

रतलाम। ढोलावाढ डेम से विस्थापित हुए आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर धरना दे दिया, इस दौरान आदिवासी समाज के लोग कलेक्टर से मिलना चाहते थे। लेकिन नवागत कलेक्टर ने 2 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उनका ज्ञापन नहीं लिया ओर अन्य अधिकारियों को भेजकर इतिश्री करने की कोशिश की लेकिन आदिवासी समाज के लोग ओर जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुराम निनामां अपनी बात पर अड़े रहे और कलेक्टर को बाहर बुलाने की मांग करते थे।  साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कलेक्टर मेडम बाहर ज्ञापन लेने नहीं आई तो ढोलावाढ का पानी रोक दिया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी उनकी खुद की होगी। करीब 2.30 घंटे तक सभी देना प्रदर्शन करते रहे ओर नारेबाजी करते रहे।

 दरअसल अपनी जमीन हड़पने और पट्टा  नहीं मिलने की समस्या लेकर धाबाईपाडा़ , बंजली के  आदिवासी बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और धरना देकर बैठ गये। प्रदर्शनकारीयों ने धोलावाढ का पानी रोकने की धमकी देते दिखें। सूचना पर मौके पर  एडिशनल एसपी, सीएसपी भी पहुंचे और समझाने की कोशिश की मगर कलेक्टर से मिलने की बात पर सभी ग्रामीण अड़े रहे। हंगामा सुन कलेक्टर मिशा सिंह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंची और सीढ़ियों पर बैठकर उनकी समस्याओं को सुना और मौक पर जाकर निराकरण करने आश्वासन दिया। आदिवासियों के द्वारा अपनी समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन भी रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह को सोपा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत के उपाध्यक्ष केशु निनामा ने बताया कि रतलाम के धोलावाड़ क्षेत्र से 1984 में कुछ आदिवासियों को विस्थापित कर कर आश्वासन दिया गया था कि उन्हें वन अधिकार के तहत पट्टा  और भूमि दी जाएगी। यह लाभ उन्हें अभी तक नहीं मिला है और अब जहां पर वह निवास कर रहे हैं वहां से उनको हटाया जा रहा है और वहां पर खदान की परमिशन दी गई है। आदिवासियों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं मिली है। इसके अलावा रतलाम के बंजली क्षेत्र में भी जो आदिवासी विगत 60 वर्षों से रह रहे हैं उन्हें भी हटाने की कवायत की जा रही है तथा वहां पर भी खदान का पट्टा दिया जा रहा है इसके अलावा अन्य मांगों को लेकर आदिवासियों के द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया तथा यह धरना प्रदर्शन लगभग 2 घंटे तक चला एडिशनल एसपी सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने धरना प्रदर्शन कर्ताओं को समझने की कोशिश करी परंतु वह कलेक्टर से बात करने की मांग पर अड़े रहे जब कलेक्टर वहां पर पहुंची तथा उनके द्वारा आश्वासन दिया गया तब आंदोलन की समाप्ति हुई। आदिवासियों को दीपावली के पश्चात निराकरण का आश्वासन दिया गया है इसके पश्चात धरना आंदोलन समाप्त हुआ।