डोसी गांव मल्टी विवाद: निगम अमला पहुंचा फ्लैट खाली करवाने, बड़ी संख्या में महिला पुलिस बल तैनात, कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे रहवासी, पारस सकलेचा पहुंचे तो मामले ने लिया राजनीतिक मोड़, कमिश्नर से हुई तू-तू, मैं-मैं

डोसी गांव मल्टी विवाद: निगम अमला पहुंचा फ्लैट खाली करवाने, बड़ी संख्या में महिला पुलिस बल तैनात, कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे रहवासी, पारस सकलेचा पहुंचे तो मामले ने लिया राजनीतिक मोड़, कमिश्नर से हुई तू-तू, मैं-मैं

रतलाम। डोसी गांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना की मल्टी में रहने वाले 200 से अधिक परिवारों द्वारा बकाया राशि जमा नहीं कराने के बाद नगर निगम की ओर से दी गई 4 अगस्त की समय-सीमा समाप्त हो गई। आज सुबह बड़ी संख्या में महिला पुलिस बल, जिला प्रशासन, नगर निगम का अमला और निगम की कई गाड़ियां मल्टी परिसर पहुंच गईं और फ्लैट खाली कराने की कार्यवाही शुरू कर दी। वहीं किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कलेक्टर कार्यालय के बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया।


कार्रवाई के विरोध में डोसीगांव मल्टी के रहवासी अपने घरों में ताले लगाकर नए कलेक्टर से मिलने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में रहवासी कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करने लगे।


इस बीच कांग्रेस नेता पारस सकलेचा डोसीगांव मल्टी पहुंचे और रहवासियों से मुलाकात कर उनका पक्ष सुना। इस दौरान उनकी नगर निगम आयुक्त से तीखी कहासुनी भी हुई। सकलेचा ने बरसात के मौसम में गरीब परिवारों को बेघर करने की कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे अमानवीय बताया और प्रशासन से कार्रवाई रोकने की मांग की। इस दौरान दोनों के बीच गहमा  गहमी का माहौल बन गया।इस दौरान पारस सकलेचा ने कमिश्नर  की नौकरी खाने की बात कह डाली जिसको लेकर भाना भड़क गए। मौके पर मौजूद रहवासियों ने भी फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की।


दरअसल नगर निगम द्वारा 31 जुलाई को मल्टी में रहने वाले 208 लोगों को फ्लैट की बकाया राशि जमा करने का नोटिस दिया गया था। 4 अगस्त तक सभी को 1.80 लाख रुपए जमा कराना था। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद आज बुधवार सुबह 11 बजे से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई।
जावरा रोड स्थित शिवशंकर कॉलोनी एवं प्रकाश नगर स्लम बस्ती, जो रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण कर बसी थी, उसका प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत डोसीगांव में पुनर्वास किया गया। सर्वे के बाद 396 हितग्राहियों की सूची कलेक्टर द्वारा अनुमोदित की गई।
वर्ष 2020-21 में रेलवे द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद तत्कालीन कलेक्टर, निगम आयुक्त एवं शहर विधायक चेतन्य काश्यप के प्रयासों से रहवासियों को डोसीगांव स्थित आवासों में शिफ्ट कराया गया। हितग्राहियों से 20 हजार रुपए मार्जिन मनी जमा कराई गई, जिसमें से 10 हजार रुपए प्रति हितग्राही विधायक फाउंडेशन द्वारा दिए गए थे। शेष 1.80 लाख रुपए पंजाब नेशनल बैंक से ऋण लेकर जमा कराए जाने थे।
नगर निगम का कहना है कि पिछले छह वर्षों में 208 कब्जाधारियों को छह बार नोटिस दिए जा चुके हैं। निगम के अनुसार अवैध बिजली और पानी कनेक्शनों से लाखों रुपए का नुकसान हुआ है और कनेक्शन काटने के बाद भी चोरी से दोबारा कनेक्शन लिए गए।
31 जुलाई को नोटिस तामील कराने पहुंची नगर निगम टीम के साथ विवाद और पथराव भी हुआ था। वहीं रहवासियों ने निगम कर्मचारियों पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के साथ मारपीट और अभद्रता के आरोप लगाए थे, जिनके वीडियो भी सामने आए थे। निगम ने चेतावनी दी है कि बकाया राशि जमा नहीं करने वाले हितग्राहियों से फ्लैट खाली कराने के साथ अमानत में खयानत का प्रकरण भी दर्ज कराया जाएगा।


आधे से ज्यादा लोगों ने न लोन लिया, न राशि जमा की
कुल 396 हितग्राहियों में से 166 ने बैंक से लोन लिया, जबकि 20 ने एकमुश्त राशि जमा कराई। वहीं 208 हितग्राहियों ने न तो लोन लिया और न ही बकाया राशि जमा की। निगम के अनुसार लोन लेने वालों में भी अधिकांश किश्तें समय पर जमा नहीं कर पाए, जिससे उनके खाते एनपीए हो गए और अन्य हितग्राहियों के ऋण भी प्रभावित हुए।


रहवासियों ने लगाए निगम पर गंभीर आरोप
रहवासियों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि बरसात के मौसम में उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। उनका कहना है कि मकान आवंटन के समय नगर निगम ने पानी, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था, लेकिन आज तक अधिकांश सुविधाएं नहीं मिल सकीं। उन्होंने निगम कर्मचारियों पर महिलाओं के साथ अभद्रता तथा विरोध करने पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के साथ मारपीट के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।