ये कैसी मंडी जहाँ महिला भारसाधक अधिकारी होने के बाद भी महिलाओं को गंदगी में शौच के लिए जाना पड़ रहा कृषि मंडी के हाल बेहाल, ना साफ सफाई ना पीने का पानी शौचालयो में जमी गंदगी, सचिव ने जिम्मेदारी से झाड़ा पल्ला!

ये कैसी मंडी जहाँ महिला भारसाधक अधिकारी होने के बाद भी महिलाओं को गंदगी में शौच के लिए जाना पड़ रहा  कृषि मंडी के हाल बेहाल, ना साफ सफाई ना पीने का पानी  शौचालयो में जमी गंदगी, सचिव ने जिम्मेदारी से झाड़ा पल्ला!

रतलाम। रतलाम की माधव राव सिंधिया कृषि उपज मंडी में अव्यवस्थाओं का आलम लगातार बढ़ता जा रहा है। मंडी परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। जगह-जगह फैली गंदगी और बदबू से किसान, व्यापारी और हम्माल परेशान हैं, वहीं महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या शौचालयों की बदहाल स्थिति बनी हुई है। बताया जा रही हैं कि मंडी की सफाई व्यवस्था ठेके पर दे रखी है उसके बाद भी सफाई ना होना जिम्मेदारो कि लापरवाही या मिलीभगत को साबित करती हैं।


मंडी में सेकंडों महिलाएं है जो यहां मजदूरी करती है मंडी परिसर में सुलभ शौचालय की हालात बद से बद्तर है मजबूर होकर गंदगी में महिलाओं को शोच करने जाना होता है । इतना ही नही यह मंडी रतलाम सहित आसपास के कई जिलों के किसानों के लिए प्रमुख कृषि उपज केंद्र मानी जाती है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचते हैं, जहां गेहूं, सोयाबीन, लहसुन और प्याज जैसी प्रमुख फसलों की नीलामी होती है। दूर-दूर से आने वाले किसानों को मंडी में घंटों रुकना पड़ता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें केवल गंदगी और अव्यवस्थाएं मिल रही हैं।
मंडी में बने शौचालयों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कई शौचालयों में पानी तक उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते महिलाओं को मजबूरी में गंदगी और खुले स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मंडी की भारसाधक अधिकारी एसडीएम आर्ची हरित हैं, तब भी महिलाओं की मूलभूत सुविधाओं की ओर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा।
मंडी परिसर में पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी के बीच किसान और मजदूर पानी के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर नल बंद पड़े हैं, वहीं जहां पानी उपलब्ध है वहां भी स्वच्छता का अभाव दिखाई देता है।


मंडी सचिव किशोर कुमार नरगावे से जब इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए सफाई व्यवस्था का ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ दिया। किसानों और मजदूरों का आरोप है कि मंडी सचिव व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण नहीं करते, जिसके चलते मंडी में गंदगी और अव्यवस्थाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।


प्रतिदिन सैकड़ों किसान और व्यापारी मंडी पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें केवल बदहाल व्यवस्थाएं मिल रही हैं। किसानों का कहना है कि मंडी प्रशासन लाखों रुपए की आय होने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसानों की मेहनत से चलने वाली इस बड़ी मंडी में साफ-सफाई, शौचालय और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता अब किसानों, व्यापारियों और आमजन में नाराजगी का कारण बनती जा रही है।