रतलाम: ब्रह्माकुमारीज़ में चैतन्य देवियों की झांकी, साक्षात दर्शन कर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
रतलाम। नवरात्रि महापर्व के पावन अवसर पर, डोंगरे नगर स्थित दिव्य दर्शन भवन में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा मां दुर्गा और मां संतोषी की एक अनूठी चैतन्य झांकी का आयोजन किया गया. अष्टमी के दिन आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को मां के साक्षात स्वरूप के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसे देखकर वे भाव-विभोर हो गए.
कार्यक्रम का शुभारंभ निखिल बोरीवाल मित्र मंडल के सदस्यों द्वारा दीप प्रज्वलन और माता रानी की आरती के साथ किया गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे निखिल बोरीवाल (मंडल महामंत्री, भाजपा, कुशाभाऊ ठाकरे मंडल एवं मित्र मंडल के सदस्यगण –
राजेश सिन्हा, पंकज बागड़ी, राहुल बोहरा, निखिल बोरीवाल, कुणाल वर्मा, अनिल दोहरे, कैलाश प्रजापत, रोहित सोलंकी, राहुल चावला, गोलू सोलंकी, राहुल खींची, ब्रह्माकुमारी सविता दीदी एवं डॉ. दिलीप नलगे विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर दीप प्रज्वलित कर झांकी का शुभारंभ किया एवं मां दुर्गा की आरती संपन्न की। वातावरण भक्तिरस से ओत-प्रोत हो उठा।
इस अवसर पर निखिल बोरीवाल जी ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि –
"चैतन्य देवियों की झांकी केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन में दिव्य गुणों के जागरण का प्रतीक है। यह झांकी हमें शक्ति, भक्ति और संस्कारों की प्रेरणा देती है।"
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने झांकी में देवियों द्वारा धारण किए गए अस्त्र-शस्त्रों और प्रतीकों के आध्यात्मिक रहस्यों पर भी प्रकाश डाला. बताया गया कि देवी के हाथ में त्रिशूल ज्ञान के तीक्ष्ण प्रहार से जीवन की बुराइयों और विकारों का संहार करने का प्रतीक है, वहीं कमल (पदम) का पुष्प यह संदेश देता है कि संसार में रहते हुए भी अपने गुणों से वातावरण को सुगंधित करना है. मां संतोषी के हाथ में ज्ञान की तलवार काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे आंतरिक विकारों को नष्ट करने का प्रतीक है.
