सर्किल जेल में मुनि सद्भाव सागरजी ने बंदियों को दिया संदेश -मनुष्य की श्वास ही उसके जीवन की शक्ति

सर्किल जेल में मुनि सद्भाव सागरजी ने बंदियों को दिया संदेश -मनुष्य की श्वास ही उसके जीवन की शक्ति

रतलाम : सर्किल जेल में दिगंबर जैन मुनि सद्भाव सागरजी ने बंदियों से मुलाकात कर उन्हें आत्मिक शांति और मानसिक स्थिरता का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान जेल अधीक्षक लक्ष्मणसिंह भदौरिया ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर सम्मान किया।
मुनिश्री ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य की श्वास ही उसके जीवन की शक्ति है। जब हम अपनी श्वास को नाभि से जोडक़र नियंत्रित करते हैं, तो मन की अशांति स्वत: समाप्त हो जाती है। विश्वास रखिए, यह साधना किसी भी दवा से अधिक प्रभावशाली है। उन्होंने बंदियों को सरल प्राणायाम विधि सिखाते हुए बताया कि चार सेकंड में श्वास लें, दो सेकंड रुकें, फिर चार सेकंड में छोड़ें। यह प्रक्रिया केवल नौ बार करें। इससे चित्त की नकारात्मकता दूर होगी और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।


मुनिश्री ने कहा कि प्रतिदिन केवल 10 मिनट योग और गुरु मंत्र जाप करने से मन की आजादी और सुख की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि जिसका कोई गुरु नहीं है, वह ? नम: मंत्र का जाप करते हुए योग करे। यह साधना जीवन में प्रसन्नता और स्थिरता लाती है। उन्होंने बंदियों को यह भी प्रेरित किया कि वे किसी का उपहास न करें, सदा प्रसन्न रहें और परमात्मा से सबके मंगल की कामना करें। श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन श्रावक संघ संयोजक मांगीलाल जैन ने बताया कि प्रवचन के अंत में मुनि सद्भाव सागरजी ने प्रतिक्रमण विधान का आयोजन किया तथा कैदियों को प्रतिक्रमण पुस्तिकाएं वितरित की।