धोंसवास मे अतिक्रमण तोडऩे का विरोध, ग्रामीणों ने फोरलेन जाम किया, पटवारी पर लगाया रुपये मांगने का आरोप, प्रशासन की नादानी से लोग होते रहे परेशान
रतलाम। आज सुबह-सुबह महू नीमच फोरलेन पर ग्राम धोंसवास पुलिस और प्रशासन बिना किसी प्लानिंग के अतिक्रमण तोडऩे पहुंच गया, जिसका नतीजा यह निकला की ग्रामीणों ने फोरलेन जाम कर दिया और इस वजह से राहगीर घंटो जाम में फंसे रहे। यह विरोध प्रदर्शन ग्राम पंचायत धौंसवास में निर्माण कार्य को ध्वस्त करने के बाद हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के पटवारी द्वारा मनमानी पूर्वक और उनकी अवैध 5 लाख रुपए की मांग पूरी नहीं करने पर कार्रवाई की गई। इधर मामले में रतलाम जिला प्रशासन स्पष्ट किया ग्राम पंचायत धौंसवास में सरकारी नाले को ब्लॉक कर निर्माण किया जा रहा था जिसे गुरुवार सुबह मुहिम के तहत कार्रवाई कर तोड़ा गया।
रतलाम से करीब दस किलोमीटर दूर ग्राम धौंसवास में आज सुबह सरकारी अमला भारी पुलिस सुरक्षा के साथ जेसीबी लेकर धर्मशाला का अवैध अतिक्रमण तोडऩे पहुंचा। आकस्मिक रूप से सुबह शुरू हुई कार्रवाई से समाज के लोगों में हडक़ंप के साथ आक्रोश पनप गया और उनके द्वारा महू -नीमच फोरलेन पर चक्काजाम कर जिला और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी मौके पर तनाव की स्थिति के दौरान एसडीओपी किशोर पाटनवाला, नामली थाना प्रभारी गायत्री सोनी, शहर एसडीएम के अलावा तहसीलदार ऋषभ ठाकुर सहित बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात बना रहा। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने करीब 2 घंटे से अधिक समय से फोरलेन को जाम कर बैठे हुए हैं और वह कार्रवाई को गलत बता रहे हैं। इस दौरान मालवीय समाज सहित भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष मोहन परिहार भी उपस्थित थे।
इधर प्रशासन का कहना है कि ग्राम पंचायत धौंसवास में शासकीय नाले को ब्लॉक करके उस पर निर्माण कार्य किया जा रहा था। इस संबंध में राजस्व और पंचायत विभाग द्वारा संबंधित निर्माण कार्य करने वालों और उपसरपंच को पूर्व में दो बार सूचना जारी की जा चुकी थी, इसके बावजूद कार्य बंद नहीं किए जाने के कारण जिला और पुलिस प्रशासन की संयुक्त वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
गौरतलब है कि इसके पहले भी प्रशासन ने नामली के आगे अतिक्रमण के नाम पर कई ढांबो को तोड़ दिया था। जिसको लेकर भी काफी विरोध हुआ था और इस मामले में पुलिस और प्रशासन एक दूसरे के पाले में कार्रवाई का ठिकरा फोड़ते नजर आए थे। वहीं आज के मामले में भी ग्रामीणों ने अतिक्रमण को लेकर भेदभाव करने का आरोप लगाया है।
