असम में बैठकर रतलाम में डिजिटल अरेस्ट की साजिश रची -देश के कई राज्यों तक आरोपियों का नेटवर्क, रतलाम पुलिस के खुलासे ने कई राज्यों की पुलिस के कान खड़ेे किए

रतलाम।  डिजिटल अरेस्ट के मामले में कल रतलाम पुलिस द्वारा किए गए खुलासे ने कई राज्यों की पुलिस के कान खड़े कर दिए है। आरोपियों ने अलग-अगल राज्यों में रहते हुए असस में बैठकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस की इस कार्रवाई से ना सिर्फएक रिटायर प्रोफेसर को २८ दिन बाद डिजिटल अरेस्ट से राहत मिली बल्कि उससे की गई एक करोड़ ३४ लाख की ठगी में भी राशि वापस मिलने की आस बंधी है। इस बीच पुलिस ने जिन ११ आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनके करीब ११ लाख रुपए भी फ्रीज करवा दिए है।
रतलाम पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए साइबर हथकंडे से करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड में एक रिटायर्ड प्रोफेसर को मुंबई क्राइम ब्रांच और कोर्ट की फर्जी कार्यवाही दिखाकर मानसिक रूप से बंधक बनाया गया और उनसे 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई।
एसपी अमित कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि 15 नवंबर 2025 को फरियादी के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा कि फरियादी के नाम से जारी सिम का इस्तेमाल बड़े फ्रॉड में हुआ है। आरोपी ने दावा किया कि मुंबई स्थित केनरा बैंक में करीब 247 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, जिसमें फरियादी का आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लगे हैं।
जब फरियादी ने इन आरोपों से इनकार किया तो उसे गिरफ्तारी वारंट और तत्काल गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। इसके बाद व्हाट्सएप और सिग्नल ऐप के जरिए लगातार वीडियो कॉल कर मानसिक दबाव बनाया गया। वीडियो कॉल पर न्यायालय जैसा सेटअप, जज, वकील और गवाहों का नाटकीय दृश्य दिखाकर फरियादी को यह विश्वास दिलाया गया कि वह "डिजिटल अरेस्ट" में है।
आरोपियों ने फरियादी से आधार कार्ड व अन्य निजी दस्तावेज हासिल किए, उसकी संपत्ति और बैंक खातों की जानकारी लेकर ब्लैकमेल किया और 15 नवंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच भय और छल से कुल 1.34 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
फरियादी रिटायर्ड प्रोफेसर हैं और उनका बेटा कनाडा में है। आरोपियों ने बेटे के नाम पर भी डराया और कहा कि  वह कभी भारत नहीं आ पाएगा। इसी डर के चलते फरियादी लगातार रकम ट्रांसफर करता रहा।
इस मामले में ई-एफ आई आर दर्ज की गई थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमित कुमार ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। थाना दीनदयाल नगर पर क्चहृस् की धारा 318(4), 319(2), 308, 111 तथा आईटी एक्ट की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।
एसपी अमित कुमार के निर्देशन में एएसपी राकेश खाखा एवं एएसपी  विवेक कुमार लाल के मार्गदर्शन में 18 सदस्यीय विशेष जांच दल (स्ढ्ढञ्ज) गठित किया गया।

कश्मीर, गुजरात, असम, बिहार और विदेश तक जुड़े तार
एसपी ने बताया कि दरअसल इस मामले में चार अलग-अलग टीम बनकर काम कर रहे लोगों की चेन क्रेक की गई है। टेलीग्राम और वाट्सएप पर कुछ आरोपी फर्जी सिम, फर्जी नाम से अकाउंट्स बनाकर फ्लेश करते हैं। इन्हें अन्य आरोपी खरीदते हैं और इन्हीं के माध्यम से एपीके एप डाउनलोड करवाकर राशि लेते हैं। यहां से राशि सूरत में आंगडय़िा के माध्यम से क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से कंबोडिया तक जाती है। यहीं से इस मामले में भी राशि ली गई। इसमें कश्मीर, गुजरात, बिहार, आसम, मप्र के चेन में अभी तक 11 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके है, जबकि कई अन्य बाकी हैं।
जबलपुर (मप्र) से अशोक पिता राधेश्याम जायसवाल 61 वर्ष,सनी पिता सोनु जायसवाल 34 वर्ष,सारांश उर्फ शानु पिता योगेन्द्र तिवारी 18 वर्ष के साथ ही एक विधि विरुद्ध बालक को पकड़ा गया। इनके खातों में ठगी की रकम में से 14 लाख रुपये की प्राप्ति पाई गई।
नीमच (मप्र) से पवन पिता कैलाश कुमावत (23 वर्ष), निवासी इन्द्रा कॉलोनी, नयागांव, थाना जावद को गिरफ्तार किया गया। इसके खाते में 14 लाख रुपये की संदिग्ध राशि मिली।
उत्तर प्रदेश से अमरेन्द्र कुमार पिता बडेलाल प्रसाद मौर्य 34 वर्ष , एक हृत्रह्र संचालक—इसके बैंक खाते में 50 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन सामने आया।
,शाहिद कुरेशी, सादिक हसन समा को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने ठगी की रकम से क्रिप्टो करेंसी खरीदी और करीब 5 लाख रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया।
पुलिस की एक टीम बिहार रवाना की गई है, जहां अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। गुजरात में भी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास सतत जारी हैं। एक आरोपी राजेश को बिहार से गिरफ्तार कर लाया जा रहा है।
एसपी अमित कुमार ने बताया कि अमरेन्द्र कुमार (गोरखपुर) के खाते—जो आईटच फाउंडेशन के नाम से संचालित है,इसमें रतलाम में हुए अपराध से 49 लाख और अन्य फ्रॉड से कुल 2 करोड़ 36 लाख रुपये आए। यह मुख्य खाता पाया गया।
अशोक जायसवाल (जबलपुर) के खाते में रतलाम अपराध के 12 लाख और अन्य फ्रॉड के 34 लाख, कुल 48 लाख रुपये आए।
आरिफ (जामनगर) के खाते में रतलाम अपराध के 10 लाख और अन्य फ्रॉड के 10 लाख, कुल 20 लाख रुपये आए।
साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से 11 लाख रुपये होल्ड कराए गए हैं। एसपी अमित कुमार ने बताया कि ठगी की राशि कंबोडिया तक के खाते में ट्रांसफर होना पाई गई है।
एसपी अमित कुमार ने बताया कि इस पूरे मामले का असम और कश्मीर तक का कनेक्शन सामने आया है जिसमें और गिरफ्तारियां होना शेष है। मुख्य आरोपियों ने असम में बैठकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।
आईटी और दूरसंचार माध्यमों के जरिए संगठित रूप से धोखाधड़ी किए जाने पर प्रकरण में क्चहृस् की धारा 111 जोड़ी गई है।