जिले में एक बार फिर उड़ी प्रभारी मंत्री के आदेश की धज्जियां:अधिकारी को अपनी व्यथा बताते हुए रो पड़ी छात्रा , कीड़े लगी दाल लेकर छात्राएं पहुंची जनसुनवाई में, छात्रावास अधीक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप
रतलाम। करीब एक वर्ष पहले जिले के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री विजय शाह ने रतलाम के अधिकारियों को छात्रावासो की व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए थे ओर साथ ही छात्राओं की हर संभव मदद करने का आश्वासन भी छात्राओं को दिया था। लेकिन इसके विपरीत जिले के कलेक्टर और अधिकारियों द्वारा प्रभारी मंत्री के आदेशों की अवहेलना करते हुए छात्रावासों की स्थिति में सुधार के कोई प्रयास नहीं किए जिसका नतीजा ये हुआ कि प्रभारी मंत्री के दौरे के बाद कई बार छात्रावास की बालिकाएं कभी पैदल तो कभी रोते बिलखते कलेक्टर कार्यलय पहुंची और अधिकारियो को प्रभारी मंत्री के आदेश याद दिलाते हुए अपनी समस्याएं बताई। लेकिन अधिकारियों द्वारा हर बार की तरह आश्वासन देकर उन्हें वापस भेज दिया।
ऐसा ही एक मामला मंगलवार को हुई जनसुनवाई में देखने को मिला जहां शहर के कन्या छात्रावासों में मिलने वाले घटिया भोजन और कीड़े लगी दाल मिलने की शिकायत अफसरों को की गई। ऐसे में यह स्पष्ट हो रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नही दे रहे इसलिए बच्चो को घटिया अथवा मनमर्जी का मीनू परोसा जा रहा है।
शहर के सागोद रोड स्थित जनजातीय सीनियर आदिवासी कन्या छात्रावास की छात्राएं छात्रावास में मिल रहे घटिया भोजन और अन्य समस्या की शिकायत लेकर कलेक्टोरेट जनसुनवाई में पहुंची। अधिकारियों ने जांच का आश्वासन देकर छात्राओं को रवाना कर दिया।

छात्रावास की बदहाली पर फूटा छात्राओं का गुस्सा, कीड़े लगी दाल दिखती नहीं और बिस्तर मिलता
शहर के कन्या छात्रावास की छात्राएं उस वक्त भावुक हो गईं जब वे हाथों में कीड़े लगी हुई दाल और अपने बैग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उनका कहना था कि हॉस्टल में उन्हें न पर्याप्त भोजन मिल रहा है, न साफ-सफाई, और न ही रहने के लिए उचित सुविधा। छात्राएं रोते हुए बोलीं – “दाल बनती है, पर दिखती नहीं; रोटियां जली हुई मिलती हैं; और हरी सब्ज़ी तो महीनों से नहीं देखी।”
छात्राओं ने अधिकारियों को बताया कि वे कक्षा 10वीं से 12वीं तक की हैं और 70 छात्राओं के लिए केवल 6 कमरे हैं। हर छात्रा से 6 हजार रुपए बिस्तर के लिए लिए जाते हैं, लेकिन न बिस्तर मिलते हैं, न अन्य सुविधाएं। उन्होंने हॉस्टल की वार्डन सुगना मईड़ा को हटाने की मांग करते हुए कहा कि जब तक उन्हें हटाया नहीं जाएगा, छात्राएं शांति से पढ़ाई नहीं कर पाएंगी।

जनसुनवाई में अधिकारियों की कार्रवाई
छात्राओं की शिकायतें सुनकर एडीएम डॉ. शालीनी श्रीवास्तव ने तत्काल जांच के आदेश दिए और शाम को खुद छात्रावास पहुंचीं। उन्होंने छात्राओं से वन-टू-वन चर्चा कर समस्याएं सुनीं। डॉ. श्रीवास्तव ने माना कि वार्डन और छात्राओं के बीच संवाद की कमी है। उन्होंने छात्राओं को आश्वासन दिया कि सभी शिकायतों पर गंभीरता से कार्यवाही की जाएगी और भविष्य में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
वार्डन हटाने की मांग पर छात्राएं अड़ीं
जनजाति विकास विभाग के क्षेत्रीय संयोजक भास्कर खींची ने पहले छात्राओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन छात्राएं वार्डन को लेकर अड़ी रहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक वार्डन मौजूद रहेंगी, वे खुलकर बात नहीं कर पाएंगी। इस पर जांच समिति बनाई गई, जो छात्रावास जाकर स्वतंत्र रूप से स्थिति का मूल्यांकन करेगी।
छात्राएं क्यों हुईं मजबूर?
छात्राओं ने कहा कि हर सुबह केवल 1 लीटर दूध से पूरे हॉस्टल की चाय बनाई जाती है। सफाई का कोई ध्यान नहीं है, झाड़ू तक उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति परीक्षा के समय और भी तनाव पैदा करती है। छात्रा सीमा मचार, रानू मईड़ा और सीमा मुनिया ने कहा, "हम पढ़ने आए हैं, लेकिन कब तक स्कूल छोड़कर अधिकारियों के चक्कर लगाएंगे?"

